2 States
2014 • Dharma Productions / Nadiadwala Grandson Entertainmentदो परिवार, दो ज़बानें, एक प्यार — इस सफ़र को नमन।
हर किरदार इन कहानियों का कुछ न कुछ क़र्ज़ रखता है — उन सबका धन्यवाद।
KaunHoTum के किरदार किसी एक फ़िल्म से सीधे नहीं निकले — ये सालों बॉलीवुड देखते रहने से बने हैं। ये रहीं वे 45 फ़िल्में जिनसे यह काम प्रेरित हुआ — एक-एक करके, दिल से। अगर कोई नाम याद दिलाए, तो उसे दोबारा देखना — असली मज़ा वहीं है।
दो परिवार, दो ज़बानें, एक प्यार — इस सफ़र को नमन।
जिस फ़िल्म ने पूरी पीढ़ी को सीने पर हाथ रखकर खुद को समझाना सिखाया। नमन।
काम से शुरू हुआ रिश्ता, दिल तक पहुँच गया। नमन।
बिना बोले भी सबसे गहरी बात कह देना — यही इस फ़िल्म का जादू था। नमन।
दो बेचैन दिमाग़, पूरा मुल्क ही जिनका खेल का मैदान था। नमन।
वह हाफ़टाइम स्पीच आज भी रोंगटे खड़े कर देती है। नमन।
थेरेपी को सामान्य बनाने वाली इस फ़िल्म को नमन।
क़ाबू और अफ़रा-तफ़री का रोमांस, एक जैसी रफ़्तार से चलता है। नमन।
"कोई एक है जो हमारे लिए कहीं लिखा हुआ है" — इस यक़ीन को नमन।
जिस फ़िल्म की हर दूसरी लाइन बॉलीवुड की ज़बान बन गई। नमन।
मिशन से ज़्यादा ज़रूरी निकला दिल का फ़ैसला। नमन।
एक माँ ने खुद के लिए सीखना शुरू किया — और पूरा घर सीख गया। नमन।
एक औरत जो अपनी शर्त पर दुनिया से लड़ी — और जीत गई। नमन।
सपनों को साम्राज्य में बदलने का जुनून — इस कहानी को नमन।
हर रुकावट एक सबक़ बन सकती है — बस नज़रिया बदलना पड़ता है। नमन।
त्याग भी प्यार की एक ज़बान है — इस फ़िल्म ने सिखाया। नमन।
सालों की नोक-झोंक के बाद पता चला कि उल्टा होना ही जोड़ था। नमन।
एक ट्रेन का सफ़र जिसने दो अधूरे लोगों को पूरा कर दिया। नमन।
दो ताज, एक इज़्ज़त से कमाया हुआ बराबरी का प्यार। नमन।
पूरे परिवार का बोझ मुस्कुराकर उठाया गया — इस फ़िल्म को नमन।
कोलकाता की गलियों में एक माँ का सबसे बड़ा ट्विस्ट छुपा था। नमन।
मुस्कान के पीछे छुपा दर्द — इस फ़िल्म ने सबको रुलाया। नमन।
कभी-कभी सबसे अच्छी कहानियाँ नियम टूटने से ही बनती हैं। नमन।
जिस फ़िल्म ने सिखाया कि सबसे गहरा प्यार दोस्ती से शुरू होता है। नमन।
एक लक्ष्य, एक गाँव, और एक जीत जो सबकी मिलकर थी। नमन।
एक आख़िरी पत्ता जिसने पूरी कहानी कह दी। नमन।
उलझन भी एक सच्चा एहसास है — इस फ़िल्म ने यह माना। नमन।
अनुशासन और हिम्मत साथ चल सकते हैं — इस फ़िल्म ने दिखाया। नमन।
जिस फ़िल्म ने सिखाया कि एक झप्पी सबसे बड़ी दवा हो सकती है। नमन।
एक बेटी, एक पिता, और एक रोड ट्रिप जिसमें मोशन ही इमोशन था। नमन।
सवाल पूछना ही सबसे बड़ा धर्म है — इस फ़िल्म ने याद दिलाया। नमन।
एक सोलो हनीमून जो असल में खुद को खोजने का सफ़र निकला। नमन।
वतन के लिए खुद को पूरा मिटा देना — इस हिम्मत को नमन।
रोज़ के छोटे कामों में छुपा प्यार — इस फ़िल्म ने दिखाया। नमन।
गलियों में भी रंगीन ज़िंदगी जीने वाली इस कहानी को नमन।
दर्द ने जब आवाज़ दी, तो एक जॉर्डन पैदा हुआ। नमन।
जय और वीरू की दोस्ती आज भी हर जोड़ी की मिसाल है। नमन।
एक एंट्री, एक अंदाज़ — और पूरा थिएटर खड़ा हो जाता था। नमन।
घर वह जगह है जहाँ कोई तुम्हें वापस बुलाता रहे — इस फ़िल्म ने यह सिखाया। नमन।
हर इंसान के अंदर कई कहानियाँ होती हैं — इस फ़िल्म ने यह ख़ूबसूरती से दिखाया। नमन।
छोटे शहर, बड़े दिल, और एक शादी जो कभी सीधी नहीं चली। नमन।
ग़लत ट्रेन सही स्टेशन तक ले गई — इस चिट्ठी वाले प्यार को नमन।
बीस साल का इंतज़ार भी एक वादे को कमज़ोर नहीं कर सका। नमन।
सुकून से शुरू हुई दोस्ती, धीरे से प्यार बन गई। नमन।
उड़ान और जड़ें — दोनों एक साथ रखना सिखाया इस कहानी ने। नमन।